BRICS meeting of environment ministers

ब्रिक्स (BRICS) दुनिया की पांच उभरती अर्थव्यवस्थाओं (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) का एक समूह है। पूर्व में इसे (BRIC) के नाम से जाना जाता था। ‘ब्रिक’ (BRIC) शब्द का पहली बार प्रयोग वर्ष 2001 में गोल्डमैन सैक्स ने अपने वैश्विक आर्थिक-पत्र ‘द वर्ल्ड नीड्स बेटर इकोनॉमिक ब्रिक्स’ में किया था। 16 जून, 2009 को रूस के येकतेरिनबर्ग में पहली बार शिखर सम्मेलन की शुरुआत हुई। इस समूह में चीन के आग्रह पर 14 अप्रैल, 2011 को चीन के सान्या में (तीसरे वार्षिक शिखर सम्मेलन) दक्षिण अफ्रीका को शामिल कर लिया गया। जिससे ब्रिक, ‘ब्रिक्स’ में रूपांतरित हो गया।

  • ब्रिक्स देशों के पर्यावरण मंत्रियों की बैठक 16 सितंबर, 2016 को ‘गोवा’ में आयोजित की गई।
  • ब्रिक्स देशों के पर्यावरण मंत्रियों ने संयुक्त कार्यसमूह और पर्यावरण संबंधी विषयों पर पारस्परिक सहयोग को लामबंद करने के लिए एक सहमति दस्तावेज को मंजूरी प्रदान की।
  • मंत्रिस्तरीय घोषणा में प्रमुख समझौतों को रेखांकित किया गया है जिन्हें आम सहमति के बाद अपनाया गया। पारस्परिक सहयोग के निम्न क्षेत्रों को इसमें शामिल किया गया-
    (i) वायु एवं जल प्रदूषण पर नियंत्रण एवं कमी।
    (ii) तरल एवं ठोस कचरे का कारगर प्रबंधन।
    (iii) जलवायु परिवर्तन एवं जैव-विविधता का संरक्षण।
  • ब्रिक्स देशों के मंत्रियों ने विकसित देशों से अपील की कि वे विभिन्न वैश्विक पर्यावरण समझौतों एवं सतत विकास लक्ष्यों से संबंधित अपनी प्रतिबद्धता पूरा करें। ब्रिक्स देशों ने ‘रियो घोषणा’ के सिद्धांतों के प्रति अपनी कटिबद्धता दोहराई।
  • बैठक में सदस्य देशों के निम्न प्रतिनिधियों ने भाग लिया-
    (i) ब्राजील का नेतृत्व वहां के पर्यावरण मंत्रालय में अंतरराष्ट्रीय मामलों के विभाग के राजदूत फर्नांडो कोयम्ब्रा ने किया।
    (ii) रूसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व प्राकृतिक संसाधन एवं पर्यावरण मंत्री सर्गेई डांस्की ने किया।
    (iii) चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पर्यावरण सुरक्षा के उपमंत्री चाओ इंगामिन ने किया।
    (iv) दक्षिण अफ्रीकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पर्यावरण मामलों के मंत्री सुश्री एडना मोलेवा ने किया।
    (v) भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनिल माधव दवे ने किया।
  • ध्यातव्य है कि ब्रिक्स देशों में शामिल देशों की आबादी वैश्विक आबादी के 46 प्रतिशत है, उसके पास पूरे विश्व के भू-भाग का 29.31 प्रतिशत क्षेत्र और पूरे विश्व के सकल घरेलू उत्पाद में 22 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। वहां समृद्ध जैव-विविधता एवं प्राकृतिक संपदा का भंडार है।




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